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Tuesday, 6 September 2016

मेरे बचपन का शहर

मेरे बचपन का शहर
मुझे देख खिल उठी और लिपट गयी मुझसे,
वो कोई और नहीं उस पेड़ की डाल थी जिसे बचपन में सींचा था मैंने,
इस जगह की मिट्टी की महक कुछ अलग ही है,
यहीं पड़ना और लिखना सीखा था मैंने,
आज आख़िर उस शहर आ ही गया मैं,
जिसे कुछ पाने की हस्र में पीछे छोड़ा था मैंने,
अब तो यादें भी बूढ़ी हो चली हैं,
उनके चेहरे की झुर्रियों से यह जाना मैंने,
जिन पेड़ो की साख में कभी रखते थे कंचे
आज उन्ही साखों पर सांपो का डेरा देखा मैंने,
एक समय था जब दूर घाटी से सुनाई देती थी बांसुरी की धुन
उन्ही घाटियों से आज गाड़ियों का शोर सुना मैंने,
अनगिनत तारों से घिरा था मेरे बचपन का आसमान,
उसी आसमाँ में आज तारों को गिना मैंने,
वो भी एक सूरज था जो करता था मेरा इंतज़ार,
आज उसी सूरज को अपनी आँखों से ओझंल होते देखा मैंने,
सांझ होते होते खा लेते थे खाना कहीं भी,
आज उसी शहर में खरीद कर पानी पिया था मैंने,
जहाँ गिरते ही थाम लेते थे हज़ारों दामन,
वहीँ आज बहुत अकेला महसूश किया मैंने,
यह मेरे बचपन की यादें थीं,
जिन्हें जवानी भर जिया था मैंने,
यह शहर आज भी मुझे उतना प्यारा हैं,
जहाँ पर सच में अपना जीवन जिया था मैंने।
जहाँ पर सच में अपना जीवन जिया था मैंने।

Monday, 5 September 2016

मेरी यादों का गांव

एक गांव जो बसता है कहीं यादों मे मेरी
जहाँ अटखेलियां करती थीं गर्मी की छुटियाँ कई

पहाड़ों की ओट में वो खुशबूदार आम के बगीचे
वो घंटाघर टेहरी का वो शाम को भूतों के किस्से

खुला मैदान जो मिलता पथरीली सी पगडण्डी पे
और जा समाता था निडर बहती भागीरथी में

याद आता है गर्मी की बारिश में वो भीग जाना
नमक और प्याज़ चुरा कर कच्चे आम संग खाना

यूँ अचानक कभी आ जाता है याद ननिहाल पहाड़ों का
कहते हैं अब शीशे से पानी की तह से घंटाघर है तकता

है ढूंढता वो खोये चेहरे, नन्हे चेहरे
जो आते थे गर्मी की छुट्टियाँ बिताने को

शायद मिल जाएँ आज भी अठखेलियां करते
सरकारी बस से गुज़र पाऊँ, कभी जाऊँ तो

Thursday, 7 July 2016

समय

समय है सबसे बड़ा बलवान
यह है सब पर मेहरबान
जीत न पाया इससे कोई भी इंसान ।

समय पर ही होते सारे काज
चाहे जितना मर्जी जोर लगा लो आज ।
है यदि समय तुम्हारे अनुकूल
तो ही कर पाओगे सारे काम तुम अपने अनुकूल ।

चाहे जितना मचालो शोर
पर नही जीत पाओगे यदि समय है तुम्हारे प्रतिकूल ।
शब्दो मे होती है ताकत बड़ी पर,
कर्मठ ही होते बलवान ।
जिस कर्म के पीछे मंशा न हो बुरी
उसका साथ देते भगवान् ।

माखन चोर थे नंद किशोर
दी थी भगवान् को भी उपाधि चोर की ।
लेकिन झुक जाते सर सभी के माखन चोर के सामने
जब समय दिखाता है अपना जोर ।

रहो हमेशा कृतज्ञ बन कर
न निकले मन से कभी अपशब्द
 न हो तुमसे भूले से भी कोई भूल ।
क्योंकि समय आने पर समय फल देगा
तुम्हारे कर्मो  के अनुकूल ।

रहे विश्वास अपने पर बस
यही सिखाता समय  हमे।
धैर्य रहे बुरे समय मे और
सुख मे भी  न भूले समय का रूप ।

लीना निर्वान

रास आती है बस खुशिया ।

शब्दो की चाशनी मे घोल कर
कहलो मन की बात
रह जाएगा द्वेष भाव यही पर
बस स्वभाव जाएगा साथ ।

सब जीत जाएँ ज॔ग यह संभव नही
पर जीत लो आज मन सबका
यह असंभव भी नही ।

टपका दो बूँद अपने अमृत की
जो मिली है सब को वरदान ।

क्यो करते हो इतना संताप
और हो जाते हो खुद ही हताश
चलो सब ले आए खुशिया
और बाँटे खुले दिल से जग मे आज।

लीना निर्वान

Sunday, 19 June 2016

विरासत On Father's Day

एक सनक एक जुनू मुझमे, जो तुझसे विरासत में आया है,
वो जिद्दीपन, वो कुछ बात पे अड़ जाना
वो हर चीज की तेह तक पहुंचना
वो जज्बा कि कुछ कर जाना, गलत सह न पाना 
गर सही है तो भिड़ जाना मगर अंजाम तक पहुंचाना 
थोड़ा ज्यादा ही है, पर कहते हैं ना, वालिद से आगे औलाद होती है
और आया है वो सीधापन, वो बड़प्पन, 
मगर थोड़ा कम,
कम रह गयी वो ज़हनियत, वो ताकत 
जो औरो को भी सवांरती थी, मुश्किल में संभलती और संभालती थी,
कई उम्रे लगेंगी तुझ जैसा बनने को, 
मगर तेरी हिदायत है खुद को खुद रहने दो,
..........
हरेक अच्छी और कच्ची आदत के लिए शुक्रिया

By Lipika

Monday, 21 March 2016

Do You Still Dare???






You may be old, You may be small,
You still have to grow,
One thing I want, everyone to know..

Nature gave us Connect, we adopted to Dare..
We became the Nature, and trust began to share....!!
They don't speak, but we still ignore, to see what they could clearly hear...!!

Selfish is this specie which was titled Humane,
Or does it actually mean..,
Do i give a damn! Hey I dont really care!!!

Winds that once touched the green,
Don't find that rhythm, true and sad, nothing is clean...!!
Music on my window, when they bounced from the cascade ,
Oh damn where did it go, its replaced by a drain.....!!!

The King of jungle whispered to himself with grin,
This shelter of mine will soon be gone, I trusted them, never made any harm...
I kept my promise , never crossed my terrain,
But who will tell them to stop this sick game??

Earth is shaking too, guess can't bear so much pain!!!

Why has everything become so scarce,
My granny never said, she has little,
 or Are we on Mars...!!!???

Colors don't appear real, things have lost Aroma,
do I need to pay more or pay later to the medical Proforma !!!!


Nature trusted us, handed over its enchanting beauty,
We somewhere failed, always remained off duty!!!

Pull up and stand, for this is trust which has no second hand,
Generations awaiting to come, they too have a share, we still need to Bare..!!
Open your eyes, take a look,
You may be Old, You may be small,
But Magic happens only when you are Aware!!!!!!

Do you still Dare?????


Indu Ticku Kohli







Saturday, 13 February 2016

हमे इल्म होता तो क्या बात होती!!!

We normally always tend to talk about two hearts in love on Valentine's but  I just thought of portraying those missing colors from the broken ones through this new creation of mine!!!


हमे इल्म होता तो क्या बात होती...

 ये साथ जो कमाया था, ये खाख से उठाया था
 ये कितना ज़रूरी था , ये ज़िद थी या जोश था

 जो चाहा उसे पाया , पा के अपने कतरों से,
 एक बार नहीं पर कई बार मिलकर सजाया था...
 दो जिस्म इक जान बने .. तेरा मेरा अब कहाँ
 जो भी था अब हमारा था!

सालो साल बीतते गए, प्यार परवान चढ़ता गया,
जाने कब किस मोड़ पे तेरा फिर तेरा ,
और तू ही तुझसे बेगाना लगता गया....
कदम जो चलते थे साथ, आज मेरा साया भी तेरे सफ़र पे कतराने लगा...

किस बात की थी ऐसी अब ज़िद्द , कि फितूर बनके सर चढ़ता गया..
जिसके बिना इक पल गवारा न था, आज उसका इक पल, पल पल मुश्किलें बढ़ाता गया,,
दम घुटने लगा, दम घुटने लगा .. मेंरे नाम से अब मेरा ही सीना दुखने लगा!!

हम खाक से उठे थे..पर ये जीवन अब राख सा होता बीत रहा है..
बिन बात के बातों का होना,,,ये रोज़ का जीना ही कोहराम सा लगने लगा है..
तुम्हे मोहब्बत अब नहीं है, हमें इजाज़त अब नहीं है,
ये बात है या मौत का फरमान!!!

जो भी है, अब जो जारी ये हो गया तो ...
इसे जी जी के मरना ही पड़ेगा..

हम रोक लेते वहीँ पे..हम टोक लेते खुदी को,

हमे इल्म होता तो क्या बात होती !
हमे इल्म होता तो क्या बात होती!!!!!


Indu Ticku Kohli