Writer

Writer
Showing posts with label Life. Show all posts
Showing posts with label Life. Show all posts

Tuesday, 21 March 2017

प्यार ज़िंदगी है


प्यार ज़िंदगी है 

जब कोई ना था तब तुम थे
मैं ख़ुद में ख़ुद को खो चुकी थी 
मुझ से  मुझको मिलवाने वाले तुम थे 
बिखर चुके अरमानो को संभालने वाले तुम थे 
खोए हुए लफ़्ज़ों को जज़्बात देने वाले तुम थे 
सिसकते दिल को दिलसा देने वाले तुम थे 
खो गयी मंज़िलो का रास्ता दिखाने वाले तुम थे 
मर गए रिश्तों को साँस देने वाले तुम थे 
उस वक़्त उस हालात में जब कोई ना था तुम थे 
तुमसे मिल कर मैंने जाना प्यार क्या होता है
रिश्तों में अहसास क्या होता है 
हर साँस का मोल क्या होता है 
अब जान गयी हूँ मान गयी हूँ 
तुझे पहचान गयी हूँ
प्यार से ही ज़िंदगी है 
प्यार ही आसमा और जमीं है 
प्यार ही बंदा और बंदगी है 
बिना शर्त जिसने प्यार किया बस वही ज़िंदगी है 
AnuYog 

Wednesday, 8 March 2017

प्यार तुम्हीं से है.......

प्यार तुम्हीं से है 

तुम्हारे पास प्यार करने का कोई कारण नहीं रहा है 
और मेरे पास प्यार के सिवा कोई कारण नहीं रहा है 
प्यार अगर तुम्हें नहीं तो क्या हमें तो है  
ये किसी एक रिश्ते की कहानी नहीं है 
प्यार के हर रिश्ते के अनकहे जज़्बात है 
आज कितने सारे सवाल मेरे सामने  है 
प्यार के रिश्ते क्या सच में इतने नाज़ुक होते है 
ये प्यार आख़िर  होता क्या है और होता क्यूँ है 
कहीं सुना था प्यार एक धोखा है 
पर हमने सुना ही कहाँ था 
सिर्फ़ जाना ही था कि प्यार तो बस होता है 
आज भी उसी प्यार को जीतें है 
सच में प्यार तो बस प्यार होता है 
अफ़सोस तो सिर्फ़ तुम्हारे लिए होता है 
क्यूँकि खोया तो तुमने है हमने तो सिर्फ़ पाया है
तुम नहीं हो पर तुम्हीं से तो प्यार सिखा है 
इस प्यार ने ही तो जीना सिखाया है 
एक हसीन सा एहसास है और ये तुम्हारा ही एहसान है 
Anuyog

Monday, 27 February 2017

ज़िंदगी के हसीन लम्हे !!!!!!!!

आज सुबह ग़लती से जल्दी उठ गयी 
लेकिन बहुत जल्दी भी नहीं ...,
पर एक बात है जल्दी उठ कर अच्छा बहुत लगा 
हल्की सी सर्दी ,कुनकुनी सी धूप, सरसराती सी हवा 
और लहराते हुए पेड़ पोधे....
ये सब तो मेरा दिल ही ले गए 
कुछ लमहें, कुछ पल, कुछ ऐसा सा आभास 
जैसे ख़ुद को ख़ुद से मिली थी काफ़ी मुद्दत के बाद 
ऐसा लगा कि एक पल में कई पल एक साथ जी लिए 
क़ुदरत के इस जादू ने तो जैसे मेरा मन ही मोह लिया 
ख़ुद से और ज़िंदगी से पहले से ज़्यादा प्यार सा हो गया 
ऐसा लगा कुछ खोया सा फिर से पा लिया हो 
ऐसा लगा ये अहसास  शायद कुछ सीखाने को आया हो 
बड़ी बड़ी ख़्वाहिशों की चाहत के चलते 
जैसे छोटे छोटे लम्हे नज़रान्दाज से हो गए हो 
बड़े बड़े सपनों कि चकाचौंध के चलते 
जैसे ये लम्हे धुँधला से गए हो 
आज ख़ुद से मिल कर और इन लम्हों को फिर से जी कर 
बरसो पुरानी धूल आज इन लम्हों से झड़ गयी सी  लगती है 
ज़िंदगी अब तो फिर से नयी नयी सी लगती है 
अब तो हर लम्हा इबादत सा लगने लगा है 
ज़िंदगी तुझ से और ज़्यादा प्यार होने सा लगा है 
Anuyog

Wednesday, 22 February 2017

*मेरी चाय*




*मेरी चाय*

माँ कहती है कि मैं चाय बहुत पीती हूँ
पर उन्हें क्या पता मैं चाय नहीं पीती हूँ,
बस ज़िंदगी को चुसकियों में पी थोड़ा और जी लेती हूँ
चाय जगाती भी है और सुलाती भी है 
हँसाती भी है रुलाती भी है 
ठंडी में गरमी का एहसास देती है 
तो कभी गरमी में राहत का एहसास देती है 
थकने पर सुकून का एहसास देती है
तो कभी परेशानी में हँसने का साहस देती है
कभी कभी सोच में पड़ जाती हूँ
क्या मैं चाय बहुत पीती हूँ
नहीं मैं चाय बहुत नहीं पीती, चाय के बहाने थोड़ा और जी लेती हूँ
और कभी कभी चाय के बहाने दोस्तों के साथ हाल ए दिल भी बाँट लेती हूँ
AnuYog 

Wednesday, 15 February 2017

क्या से क्या हो गए

ढूंढते हैं उसको जिसे कहीं छोड़ आए हैं
वो मुस्कराहट, वो बेबाकपन जो कहीं भूल आए हैं
कई चेहरों का नक़ाब ओढ़े असल से जुदा हो गए
ज़िन्दगी आगे बढ़ गयी हम क्या से क्या हो गए

माथे से लेकर बिस्तर की सिलवटें जो मेरी थीं
वो चैन, वो ठहाके, वो नींदें जो मेरी थीं
कई ख्वाइशों के बोझ के तले रुबा हो गए
ज़िन्दगी आगे बढ़ गयी हम क्या से क्या हो गए

ख्यालों से लेकर हौसलों की तिशनगी थी मेरी
उन्हें पूरा करने न करने की आज़ादी थी मेरी
कई हौसलों के ज़ोर में बेनिशाँ हो गए
ज़िन्दगी आगे बढ़ गयी हम क्या से क्या हो गए

यूँ नहीं के ज़िन्दगी से कोई शिकवा है हमें
इस डोर, इस बंदिश का भी दरकार है हमें
कई आहटों के शोर में बेज़ुबान हो गए
ज़िन्दगी आगे बढ़ गयी हम क्या से क्या हो गए

Wednesday, 25 January 2017

वो मुलाकात बाकी है

शायद कहीं एक ख्वाइश रह गयी ज़िन्दगी से
जो उस रोज़ मेरे दर तक आके लौट गयी
कहीं एक मौसम मेरी आँखों में छुप के रह गया
उस मौसम की वो बरसात बाकी है

अधूरी सी ज़िन्दगी बह चली बिना छोर
के मुड़ के देखने का दम भी न हुआ
उस पल में जो छूट गयी बातें कई ख़ास
उस अनछुए पल का मलाल बाकी है

गर रुक के रोक लिया होता वो लम्हा उस दिन
न बीतती हर शाम मेरी यूँ कसक में
वो तन्हाई जो मुझमे सुबह से रात करती है
उस अधूरी रात की वो बात बाकी है

मिल जा ऐ मेरे हमराज़ आज भी कहीं
के वो रूका सा वक़्त चलने को बेकरार है
रोज़ उस दर पे मेरी रूह ढूंढती है तुझे
ऐ ज़िन्दगी तुझसे वो मुलाकात बाकी है

Saturday, 5 November 2016

ज़िन्दगी से एक मुलाकात

ज़िन्दगी से एक मुलाकात

रात का सन्नाटा था
दरवाजे पे एक दस्तक हुई
सहमी सी धीमी आवाज़ मैं मैंने पूछा "कौन है?"
एक जानी पहचानी आवाज़ आई "ज़िन्दगी"

विश्वास नहीं था अपनी आँखों पे
मेरे सामने खड़ी थी मेरी ज़िन्दगी
सिल गए थे लब पर आँखों ने कह दिया
बस तुम्हारा ही तो इंतज़ार था, ऐ ज़िन्दगी

खो गयी थी दुनिया की भीड़ में
कहाँ जाना है, क्या पाना है
अनगिनत थे सवाल "क्या चाहती हो ज़िन्दगी?"
शिकवे थे अनेक "क्यों इतना सताती हो ज़िन्दगी!"

पर जब ज़िन्दगी से आमना सामना हुआ
न कुछ कहा न ही कुछ पूछा
बस ज़िन्दगी को गले लगाया
और मिल गए सारे जवाब

        कितने उतार चढ़ाव दिखती है ज़िन्दगी
        कभी हँसाती तो कभी रुलाती है ज़िन्दगी
        कैद करने की इसको कोशिश है व्यर्थ
        एक झरने की तरह बहती जाती है ज़िन्दगी

        एक खूबसूरत सफ़र है ज़िन्दगी
        साथ चले वो हमसफ़र है ज़िन्दगी
        जब तक जान है, साँसे चलेगी
        जब तक साँसे हैं, तब तक है ज़िन्दगी

        एक प्यारा सा एहसास है ज़िन्दगी
        जीने की उम्मीद और एक आस है ज़िन्दगी
        ख़ुशी दे या गम दे, अपने गले लगा लो
        खो कर जाना है, कितनी ख़ास है ज़िन्दगी

भूल नहीं सकती कभी वो रात
जब हुई थी ज़िन्दगी से एक मुलाकात

- सीमा शर्मा