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Tuesday, 21 March 2017
प्यार ज़िंदगी है
Wednesday, 8 March 2017
प्यार तुम्हीं से है.......
Monday, 27 February 2017
ज़िंदगी के हसीन लम्हे !!!!!!!!
Wednesday, 22 February 2017
*मेरी चाय*
Wednesday, 15 February 2017
क्या से क्या हो गए
ढूंढते हैं उसको जिसे कहीं छोड़ आए हैं
वो मुस्कराहट, वो बेबाकपन जो कहीं भूल आए हैं
कई चेहरों का नक़ाब ओढ़े असल से जुदा हो गए
ज़िन्दगी आगे बढ़ गयी हम क्या से क्या हो गए
माथे से लेकर बिस्तर की सिलवटें जो मेरी थीं
वो चैन, वो ठहाके, वो नींदें जो मेरी थीं
कई ख्वाइशों के बोझ के तले रुबा हो गए
ज़िन्दगी आगे बढ़ गयी हम क्या से क्या हो गए
ख्यालों से लेकर हौसलों की तिशनगी थी मेरी
उन्हें पूरा करने न करने की आज़ादी थी मेरी
कई हौसलों के ज़ोर में बेनिशाँ हो गए
ज़िन्दगी आगे बढ़ गयी हम क्या से क्या हो गए
यूँ नहीं के ज़िन्दगी से कोई शिकवा है हमें
इस डोर, इस बंदिश का भी दरकार है हमें
कई आहटों के शोर में बेज़ुबान हो गए
ज़िन्दगी आगे बढ़ गयी हम क्या से क्या हो गए
Wednesday, 25 January 2017
वो मुलाकात बाकी है
शायद कहीं एक ख्वाइश रह गयी ज़िन्दगी से
जो उस रोज़ मेरे दर तक आके लौट गयी
कहीं एक मौसम मेरी आँखों में छुप के रह गया
उस मौसम की वो बरसात बाकी है
अधूरी सी ज़िन्दगी बह चली बिना छोर
के मुड़ के देखने का दम भी न हुआ
उस पल में जो छूट गयी बातें कई ख़ास
उस अनछुए पल का मलाल बाकी है
गर रुक के रोक लिया होता वो लम्हा उस दिन
न बीतती हर शाम मेरी यूँ कसक में
वो तन्हाई जो मुझमे सुबह से रात करती है
उस अधूरी रात की वो बात बाकी है
मिल जा ऐ मेरे हमराज़ आज भी कहीं
के वो रूका सा वक़्त चलने को बेकरार है
रोज़ उस दर पे मेरी रूह ढूंढती है तुझे
ऐ ज़िन्दगी तुझसे वो मुलाकात बाकी है
Saturday, 5 November 2016
ज़िन्दगी से एक मुलाकात
रात का सन्नाटा था
दरवाजे पे एक दस्तक हुई
सहमी सी धीमी आवाज़ मैं मैंने पूछा "कौन है?"
एक जानी पहचानी आवाज़ आई "ज़िन्दगी"
विश्वास नहीं था अपनी आँखों पे
मेरे सामने खड़ी थी मेरी ज़िन्दगी
सिल गए थे लब पर आँखों ने कह दिया
बस तुम्हारा ही तो इंतज़ार था, ऐ ज़िन्दगी
खो गयी थी दुनिया की भीड़ में
कहाँ जाना है, क्या पाना है
अनगिनत थे सवाल "क्या चाहती हो ज़िन्दगी?"
शिकवे थे अनेक "क्यों इतना सताती हो ज़िन्दगी!"
पर जब ज़िन्दगी से आमना सामना हुआ
न कुछ कहा न ही कुछ पूछा
बस ज़िन्दगी को गले लगाया
और मिल गए सारे जवाब
कितने उतार चढ़ाव दिखती है ज़िन्दगी
कभी हँसाती तो कभी रुलाती है ज़िन्दगी
कैद करने की इसको कोशिश है व्यर्थ
एक झरने की तरह बहती जाती है ज़िन्दगी
एक खूबसूरत सफ़र है ज़िन्दगी
साथ चले वो हमसफ़र है ज़िन्दगी
जब तक जान है, साँसे चलेगी
जब तक साँसे हैं, तब तक है ज़िन्दगी
एक प्यारा सा एहसास है ज़िन्दगी
जीने की उम्मीद और एक आस है ज़िन्दगी
ख़ुशी दे या गम दे, अपने गले लगा लो
खो कर जाना है, कितनी ख़ास है ज़िन्दगी
भूल नहीं सकती कभी वो रात
जब हुई थी ज़िन्दगी से एक मुलाकात
- सीमा शर्मा