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Tuesday, 21 February 2017

अनुभव

आप सब के समक्ष एक बार फिर मेरे  जीवन का अनोखा अनुभव। 😊

जाड़ों की धूप में
पसार कर अपना ही अनुरूप मैं,
बंद कर चक्षुओं को,
थी कही शून्य मे मैं।

तेज था सूरज का चहूं ओर
जिसके मध्य खड़ी थी अंधकार में मैं अबोध।

महसूस करना चाहती थी
उस तेज को मैं,
पर बोध नहीं था कब, किस तरह पहुंच पाऊंगी उस तेज के समीप मैं।

यूं तो है संवास  मे मेरे अपने
लेकिन फिर भी है तृष्णा कहीं,
जानना चाहती हूं  क्या है उस ओर
जो बुला रहा है मुझे शून्य से अपनी ओर।

जिसका है अथाह प्रकाश
जिसने रंग दिया है 'लाल'
ये नीला आकाश।

बंद कर चक्षुओं को
थी कही शून्य मे मैं
तेज था सूरज का चहूं ओर
जिसके मध्य खड़ी थी अंधकार में मैं अबोध।

लीना निर्वान

अनमोल उपहार

आप सब के समक्ष ....

अनमोल उपहार

सृष्टि का ये अजब खेल था
जब हमारा हुआ मेल था।

याद है मुझे आज भी वो दिन जब
बस यूँही कर रहे थे तुम मेरा इन्तज़ार,
जब मैंने दिया था तुम्हारे हाथो मे अपना हाथ।

बीत गया था पूरा दिन यूँ ही सुनते सुनाते तुम्हारे मन की बात,
पकड़ कर मेरा हाथ शायद ढूंढ रहे थे मेरी और अपनी लकीरों मे जुड़ते हमारे भविष्य का सार।

तभी तो मौन रह कर तुमने किया था
मन ही मन विचलित होते हुए मेरा
सालों-साल इन्तज़ार ।

तुम से मिल कर मुझे हुआ कुछ ऐसा ऐहसास मानो सृष्टि ने दिया हो मुझे मेरा अनमोल उपहार ।

उदार मन, शांत चित और धीरज है तुम मे अपार,
सृष्टि ने दिया मुझे मेरा सबसे अनमोल उपहार ।

भिन्न थी आदते हमारी,  भिन्न थे विचार
तब भी विधाता ने जोड़ दिए हमारे मन के तार ।

अब ले चलो मुझे बन कर सारथी मेरे
क्योंकि जीत लिया है मन मेरा तुम ने बन कर मेरा विधाता, मेरा मान, मेरा  अभिमान ।

नतमस्तक हूँ मैं ईश्वर के सामने जिन्होंने मिला दिया हमें, बना कर तुम्हे कृष्ण और मुझे राधा का अवतार ।

लीना निर्वान 🙏🏼😊

Wednesday, 15 February 2017

क्या से क्या हो गए

ढूंढते हैं उसको जिसे कहीं छोड़ आए हैं
वो मुस्कराहट, वो बेबाकपन जो कहीं भूल आए हैं
कई चेहरों का नक़ाब ओढ़े असल से जुदा हो गए
ज़िन्दगी आगे बढ़ गयी हम क्या से क्या हो गए

माथे से लेकर बिस्तर की सिलवटें जो मेरी थीं
वो चैन, वो ठहाके, वो नींदें जो मेरी थीं
कई ख्वाइशों के बोझ के तले रुबा हो गए
ज़िन्दगी आगे बढ़ गयी हम क्या से क्या हो गए

ख्यालों से लेकर हौसलों की तिशनगी थी मेरी
उन्हें पूरा करने न करने की आज़ादी थी मेरी
कई हौसलों के ज़ोर में बेनिशाँ हो गए
ज़िन्दगी आगे बढ़ गयी हम क्या से क्या हो गए

यूँ नहीं के ज़िन्दगी से कोई शिकवा है हमें
इस डोर, इस बंदिश का भी दरकार है हमें
कई आहटों के शोर में बेज़ुबान हो गए
ज़िन्दगी आगे बढ़ गयी हम क्या से क्या हो गए

Thursday, 26 January 2017

ऐ जिंदगी, जब तक हारा नही मैं, तू जीती कहाँ है।

हजारों कांटे बिछा ले तू राहों में मेरी,
तेरे कर्म से ज्यादा, मुझे अपने श्रम पे यकींन है
अपनी नाकाम कोशिशों पर न खुश हो तू इतना, ऐ जिंदगी
जब तक हारा नही मैं, तू जीती कहाँ है।

जितनी चाहे तूू दे दे मुझे रातें अंधियारी,
तेरे अंधेरों से ज्यादा मेरी रोशनी प्रबल है
होगा तुझे कलयुग के शैतान पेे भरोसा,
पर तेरे भरोसे से ज्यादा मेरी आस्था सबल है
अपने इन अंधेरों को ज़रा अभी संजो के रख जो मुझको डरा दे इनमेंं वो बल ही कहाँ है
अपनी नाकाम कोशिशों पर न खुश हो तू इतना,ऐ जिंदगी
जब तक हारा नही मैं, तू जीती कहाँ है।

कर दे मेरे सफर को तू चाहे मुश्किल पर्वतों सा,
चाहे मेरी रांहे लम्बी आसमां तक कर दे
होगा तेरा मकसद मुझे मेरी मंजिल से दूर ले जाने का
पर तूझे क्या पता, मेरा तो हठ ही है आसमान पाने का
अपनी इन राहों को थोड़ा और मुश्किल कर दे मुझेे लक्ष्य से डिगा दे इनमे वो दम ही कहाँ है
अपनी नाकाम कोशिशों पर न खुश हो तू इतना,ऐ जिंदगी
जब तक हारा नही मैं, तू जीती कहाँ है।
ऐ जिंदगी, जब तक हारा नही मैं, तू जीती कहाँ है।

हेम

Wednesday, 25 January 2017

वो मुलाकात बाकी है

शायद कहीं एक ख्वाइश रह गयी ज़िन्दगी से
जो उस रोज़ मेरे दर तक आके लौट गयी
कहीं एक मौसम मेरी आँखों में छुप के रह गया
उस मौसम की वो बरसात बाकी है

अधूरी सी ज़िन्दगी बह चली बिना छोर
के मुड़ के देखने का दम भी न हुआ
उस पल में जो छूट गयी बातें कई ख़ास
उस अनछुए पल का मलाल बाकी है

गर रुक के रोक लिया होता वो लम्हा उस दिन
न बीतती हर शाम मेरी यूँ कसक में
वो तन्हाई जो मुझमे सुबह से रात करती है
उस अधूरी रात की वो बात बाकी है

मिल जा ऐ मेरे हमराज़ आज भी कहीं
के वो रूका सा वक़्त चलने को बेकरार है
रोज़ उस दर पे मेरी रूह ढूंढती है तुझे
ऐ ज़िन्दगी तुझसे वो मुलाकात बाकी है

Friday, 6 January 2017

बड़ा भाई

आज जो बचपन से जवानी आयी है
यूँ चाँद सी शख्सियत संवर आयी है
छुटपन की दोस्ती नया मकाम लायी है
आज भाई ने 40 पार लगाई है

झगड़ो में मिठास तब भी थी अब भी है
ज़िद का मिजाज़ तब भी थी अब भी है
वो बचपन की आदत नया रंग लायी है
आज भाई ने 40 पार लगाई है

वो अलट पलट के मुह फुलाना
सीक्रेट चुटकुलों पर जम के ठहाके लगाना
हर मौके पर तेरी मुस्कराहट साथ पायी है
आज भाई ने 40 पार लगाई है

अगले 40 के मोड़ पर जब मुलाकात होगी
तेरे मेरे एक नए सफर की शुरुआत होगी
तब भी तेरी स्वेटर आएगी शायद पैंट छोटी पड़े
तब भी तेरा गुस्सा हँसके ही सहना पड़े

इस वाले पर हमने भी जमके लगाई है
आज भाई ने 40 पार लगाई है