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Tuesday, 2 May 2017

सब शायर हुए फिरते हैं

हर बात पे बेअदबी का मिज़ाज़ मिलता है
वो चेहरे पे शराफत का नकाब लिए फिरते हैं

मीनारें गिरें तो फिर संवार दी जाती हैं
उनका ख़ालिक़ भी क्या करे जो एहद ए वफ़ा में गिरते हैं

खास ये है कि जो खुद पे अमल करना था
वो नसीहत औरों को दिए फिरते हैं

उलझे हैं कुछ इस तरह तेरे अल्फ़ाज़ों में ऐ शायर
तुकबंदी का रेख्ता लिए फिरते हैं

पर कमाल है ये तब यकीन होता है
जब जवाबजोरी में चोरी की शायरी दिए फिरते हैं

मगर गुरुर ए रंजिश नहीं फक्र है शायर
हमारी सोहबत में सब शायर हुए फिरते हैं

Tuesday, 21 March 2017

प्यार ज़िंदगी है


प्यार ज़िंदगी है 

जब कोई ना था तब तुम थे
मैं ख़ुद में ख़ुद को खो चुकी थी 
मुझ से  मुझको मिलवाने वाले तुम थे 
बिखर चुके अरमानो को संभालने वाले तुम थे 
खोए हुए लफ़्ज़ों को जज़्बात देने वाले तुम थे 
सिसकते दिल को दिलसा देने वाले तुम थे 
खो गयी मंज़िलो का रास्ता दिखाने वाले तुम थे 
मर गए रिश्तों को साँस देने वाले तुम थे 
उस वक़्त उस हालात में जब कोई ना था तुम थे 
तुमसे मिल कर मैंने जाना प्यार क्या होता है
रिश्तों में अहसास क्या होता है 
हर साँस का मोल क्या होता है 
अब जान गयी हूँ मान गयी हूँ 
तुझे पहचान गयी हूँ
प्यार से ही ज़िंदगी है 
प्यार ही आसमा और जमीं है 
प्यार ही बंदा और बंदगी है 
बिना शर्त जिसने प्यार किया बस वही ज़िंदगी है 
AnuYog 

Wednesday, 8 March 2017

प्यार तुम्हीं से है.......

प्यार तुम्हीं से है 

तुम्हारे पास प्यार करने का कोई कारण नहीं रहा है 
और मेरे पास प्यार के सिवा कोई कारण नहीं रहा है 
प्यार अगर तुम्हें नहीं तो क्या हमें तो है  
ये किसी एक रिश्ते की कहानी नहीं है 
प्यार के हर रिश्ते के अनकहे जज़्बात है 
आज कितने सारे सवाल मेरे सामने  है 
प्यार के रिश्ते क्या सच में इतने नाज़ुक होते है 
ये प्यार आख़िर  होता क्या है और होता क्यूँ है 
कहीं सुना था प्यार एक धोखा है 
पर हमने सुना ही कहाँ था 
सिर्फ़ जाना ही था कि प्यार तो बस होता है 
आज भी उसी प्यार को जीतें है 
सच में प्यार तो बस प्यार होता है 
अफ़सोस तो सिर्फ़ तुम्हारे लिए होता है 
क्यूँकि खोया तो तुमने है हमने तो सिर्फ़ पाया है
तुम नहीं हो पर तुम्हीं से तो प्यार सिखा है 
इस प्यार ने ही तो जीना सिखाया है 
एक हसीन सा एहसास है और ये तुम्हारा ही एहसान है 
Anuyog

Monday, 27 February 2017

ज़िंदगी के हसीन लम्हे !!!!!!!!

आज सुबह ग़लती से जल्दी उठ गयी 
लेकिन बहुत जल्दी भी नहीं ...,
पर एक बात है जल्दी उठ कर अच्छा बहुत लगा 
हल्की सी सर्दी ,कुनकुनी सी धूप, सरसराती सी हवा 
और लहराते हुए पेड़ पोधे....
ये सब तो मेरा दिल ही ले गए 
कुछ लमहें, कुछ पल, कुछ ऐसा सा आभास 
जैसे ख़ुद को ख़ुद से मिली थी काफ़ी मुद्दत के बाद 
ऐसा लगा कि एक पल में कई पल एक साथ जी लिए 
क़ुदरत के इस जादू ने तो जैसे मेरा मन ही मोह लिया 
ख़ुद से और ज़िंदगी से पहले से ज़्यादा प्यार सा हो गया 
ऐसा लगा कुछ खोया सा फिर से पा लिया हो 
ऐसा लगा ये अहसास  शायद कुछ सीखाने को आया हो 
बड़ी बड़ी ख़्वाहिशों की चाहत के चलते 
जैसे छोटे छोटे लम्हे नज़रान्दाज से हो गए हो 
बड़े बड़े सपनों कि चकाचौंध के चलते 
जैसे ये लम्हे धुँधला से गए हो 
आज ख़ुद से मिल कर और इन लम्हों को फिर से जी कर 
बरसो पुरानी धूल आज इन लम्हों से झड़ गयी सी  लगती है 
ज़िंदगी अब तो फिर से नयी नयी सी लगती है 
अब तो हर लम्हा इबादत सा लगने लगा है 
ज़िंदगी तुझ से और ज़्यादा प्यार होने सा लगा है 
Anuyog

Thursday, 23 February 2017

वो अहसास अपना सा .........

वो अहसास अपना सा .........

एक ज़माना था जब अपने Family और Friends के Birthday और Aniversary याद रखा करते थे 
पर अब ये काम social media ने संभाल लिया है 
किसी भी special day से कुछ दिन पहले या same day उसका notificationआ जाता है या कोई group में से ही कोई remind करा देता है .......
भूलने के chances ज़रा कम ही रहते है 
एक वक़्त था अगर ऐसा कुछ भूल जाओ 
तो फिर आप समझ जाओ की वो तो गया ....
और ख़ास कर पतिदेव भूल गए तो ........;)
फिर हो गया .........
और फिर वो मान मनुहार वो माफ़ी 
वो tension का सा माहौल 
अब madam कब मानेगी ....
अब ये तो पति के skills पर ही depend होता था 
कितने समय तक कौन किस पर हावी 
एक बड़ा सा माफ़ीनामा
और एक भारी भरकम सा हर्ज़ाना 
लेकिन कुछ भी हो वो वक़्त ही कुछ अलग था 
वो रूठने मनाने का अहसास भी जुदा था 
ख़ास ख़ास कुछ लोग ही मुबारक देते थे 
उसके जज़्बात भी कुछ जुदा से होते थे 
वक़्त बदल गया है 
Face to face की जगह Face book का ज़माना हो गया है 
ये भी अच्छा है 
पर उसका अहसास तो आज भी कुछ special सा है
AnuYog 

Wednesday, 22 February 2017

*मेरी चाय*




*मेरी चाय*

माँ कहती है कि मैं चाय बहुत पीती हूँ
पर उन्हें क्या पता मैं चाय नहीं पीती हूँ,
बस ज़िंदगी को चुसकियों में पी थोड़ा और जी लेती हूँ
चाय जगाती भी है और सुलाती भी है 
हँसाती भी है रुलाती भी है 
ठंडी में गरमी का एहसास देती है 
तो कभी गरमी में राहत का एहसास देती है 
थकने पर सुकून का एहसास देती है
तो कभी परेशानी में हँसने का साहस देती है
कभी कभी सोच में पड़ जाती हूँ
क्या मैं चाय बहुत पीती हूँ
नहीं मैं चाय बहुत नहीं पीती, चाय के बहाने थोड़ा और जी लेती हूँ
और कभी कभी चाय के बहाने दोस्तों के साथ हाल ए दिल भी बाँट लेती हूँ
AnuYog 

Tuesday, 21 February 2017

हाँ! रंग चढ़ा है मुझ पर मेरी जीत का।

एक बार फिर आप  सब के समक्ष मेरे कुछ विचार जो है आज बेटियों को समर्पित। बेटियाँ जिनके आ जाने से भर जाती है घर मे उर्जा।

हाँ! रंग चढ़ा है मुझ पर मेरी जीत का......

हाँ! रंग चढ़ा है मुझ पर मेरी जीत का,
हाँ! कर दिखाया है मैंने अपने वजूद का सर ऊँचा,
हाँ!  कर दिया है साबित मैंने कि मै भी हूँ जिन्दा,
हाँ!  मै हूँ एक बेटी जिसने लगा दिया है चाँद की चाँदनी पर तमग़ा।

अब नही रूकूँगी मै,
अब नही झुकूँगी मै,
दिखाऊंगी अब अपना हुनर
तूफानो मे पड़ी धूल को झाड़ कर।

हाँ! रंग चढ़ा है मुझ पर मेरी जीत का।

लाचारीयत अब न घेर पाएगी मुझे,
बेचारगी अब न दे पाएगी पनाह मुझे,
दिया है मेरे माँ बाबा ने भरोसा मुझे,
दिखाऊंगी अब अपना हुनर तूफानो मे पड़ी धूल को झाड़ कर।

हाँ रंग चढ़ा है मुझ पर मेरी जीत का.....

अब कभी बुझ न पाए लौ कभी कन्या के भूण की
करती हूँ आश्वस्त लेकर आऊंगी मै क्रान्ति ऐसे हुजूम की जो लेकर चलेगी मशाल मेरे वजूद की।

हाँ! कर दिया है साबित मैंने कि मै हूँ जिन्दा,
हाँ! मै हूँ एक बेटी जिसने लगा दिया है चाँद की चाँदनी पर तमग़ा।

लीना निर्वान